Veerakesari 12:10
अलीगढ़ : इस दुनिया में न तो किसी का जन्म होता है और न किसी का कोई जन्मदाता है न किसी का कोई अन्न दाता है। सिर्फ कर्म के कारण ही यह प्राप्त होता है। इस लिए प्रत्येक व्यक्ति को कर्म करना चाहिए। जीव को सुख-दुख की अनुभूति कर्म के अनुसार होती है। उक्त प्रवचन कस्बा के हास्पीटल रोड स्थित लक्ष्मी नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यास सुखदेव जी महाराज ने कहे। 
उन्होंने आगे कहा कि भक्ति तब ही सार्थक है जब भक्त परमात्मा से कुछ नहीं चाहता है, परमात्मा भी जब उसका भक्त से कोई याचना नहीं करता है तो वह उसको उसकी जरुरत के अनुसार सब कुछ दे देता है। वहीं संदीपन गुरु के आश्रम में शिक्षा की कथा, मथुरा आगमन की लीला, कंस बध लीला, महारास लीला के साथ ही श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया। कथा के बीच-बीच में संकीर्तन कराकर श्रोताओं का रसास्वादन कराया। कथा के अंत में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का विवाह संपन्न कराया गया।
Jagaran

Post a Comment

Powered by Blogger.